एक वृत्ताकार कुंडली जिसकी त्रिज्या 8 -0 cm तथा फेरों की संख्या 20 है अपने ऊर्ध्वाधर व्यास के परितः `50rads^(-1)` की कोणीय आवृत्ति से `3.0xx10^(-2)` T के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में घूम रही है। कुंडली में उत्पन्न अधिकतम तथा औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान ज्ञात कीजिए। यदि कुंडली `10Omega` प्रतिरोध का एक बंद लूप बनाए तो कुंडली में धारा के अधिकतम मान की गणना कीजिए। जूल ऊष्मन के कारण क्षयित औसत शक्ति की गणना कीजिए। यह शक्ति कहा से प्राप्त होती है?

5 views

1 Answers

r=8.0 सेमी `= 8.0xx10^(-2)m`, `omega = 50rad s^(-1)`
`N=20,B=3.0xx10^(-2)T`
`epsilon=NBAomegasinomegat`
`epsilon_(max)=NBAomega=Nbpir^(2)omega`
`=20xx3.0xx10^(-2)xx3.14xx(8.0xx10^(-2))^(2)xx50`
`=602880xx10^(-6)=0.603V`
प्रति चक्र औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल शून्य होता है।
दिया है : R = 10`Omega`
`thereforeI_(max)=(epsilon_(max))/R=(0.603)/10`=0.0603A`
क्षयित औसत शक्ति `P=1/2epsilon_(max)xxI_(max)`
`=1/2xx0.603xx0.0603=0.018W`
बाह्य स्त्रोत के द्वारा, जो कुंडली को घुमाता है, शक्ति प्राप्त होती है।

5 views

Related Questions