स्वप्रेरकत्व क्या है? दो कुंडलियों के स्वप्रेरकत्व `L_(1)` व `L_(2)` हैं। इन्हे-
समान्तर क्रम में जोड़ने पर

4 views

1 Answers

समान्तर संयोजन - समान्तर कर्म में जोड़ने पर माना की कुंडलियों में प्रवाहित धाराएँ क्रमशः `I_(1)` व `I_(2)` हैं, अतः कुल धारा
`I =I_(1)+I_(2)`
`(dI)/(dt)=(dI_(1))/(dt)+(dI_(2))/(dt)`
समान्तर क्रम में जुड़े होने के कारण प्रत्येक कुंडली में उत्पन्न प्रेरित वि० वा० बल समान होंगे, अतः
`e=-L_(1)(d I_(1))/(dt)=-L_(2) (d I_(2))/(d t)`
या `(dI_(1))/(dt)=-e/L_(1), (d I_(2))/(dt)=-e/L_(2)`
यदि तुल्य प्रेरकत्व L हो, तो
`e=-L=(dI)/(dt)`
`e/L=-(dI)/(dt)=-((dI_(1))/(dt)+(dI_(2))/(dt))`
`=e/L_(1)+e/L_(2)`
या `1/L=1/(L_(1))+1/(L_(2))`

4 views

Related Questions