स्वप्रेरकत्व क्या है? दो कुंडलियों के स्वप्रेरकत्व `L_(1)` व `L_(2)` हैं। इन्हे-
श्रेणीक्रम में जोड़ने पर

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श्रेणी संयोजन - दोनों कुंडली को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर उनमे समान धारा (मान की I) प्रवाहित होगी। अतः उनसे सम्बद्ध कुल फ्लक्स
`phi =` प्रथम कुंडली से सम्बद्ध फ्लक्स + द्वितीय कुंडली से सम्बद्ध फ्लक्स
`=L_(1)I+L_(2)I`
`=(L_(1)+L_(2))I` ...(1)
अब यदि तुल्य प्रेरकत्व L हो, तो
`phi =LI` ...(2)
अतः समीकरण (1) और (2) से,
`L=L_(1)+L_(2)` ...(3)
यही दो प्रेरकत्व के श्रेणी संयोजन में तुल्य प्रेरकत्व का सूत्र है।

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