किसी विद्युत टोस्टर में नाइक्रोम के तपन अवयव का उपयोग होता है । जब इसमें एक नगण्य लघु विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो कक्ष ताप पर `( 27.0^(@)C)` इसका
किसी विद्युत टोस्टर में नाइक्रोम के तपन अवयव का उपयोग होता है । जब इसमें एक नगण्य लघु विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो कक्ष ताप पर `( 27.0^(@)C)` इसका प्रतिरोध `75.3 Omega` पाया जाता है जब इस टोस्टर को 230 V आपूर्ति से संयोजित करते है , तो कुछ सेकंड में परिपथ में 2.68 A कि स्थायी धारा स्थापित हो जाती है । नाइक्रोम - अवयव का स्थायी ताप क्या है ? नाइक्रोम का सम्मिलित ताप परस्पर में प्रतिरोध ताप गुणांक `1.70 xx10^(4)C^(-1)` है ।
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माना अवयव का ताप `t_(1)` है जो कमरे के ताप के बराबर है । स्थिति में धारा के अल्प मान के कारण तापीय प्रभावों कि उपेक्षा कि गई है । जब टोस्टर को आपूर्ति से संयोजित किया जायेगा तो प्रारंभिकधारा स्थायी मान 2.68 A से कुछ अधिक हो जाएगी । लेकिन विद्युत धारा के तापीय प्रभाव के कारण ताप बढ़ेगा जिससे प्रतिरोध बढ़ने लगेगा और धारा के मान में कमी उत्पन्न होगी । कुछ सेकण्ड में स्थायी अवस्था प्राप्त हो जाएगी एवं ताप नहीं बढ़ेगा । अवयव का प्रतिरोध तथा आपूर्ति से ली गई विद्युत धारा दोनों स्थायी मान प्राप्त कर लेंगे ।
तब स्थायी ताप `t_(2)` पर प्रतिरोध `R_(2)` का मान
` R_(2) = V/i = (230V)/(2.68A) = 85. 8 Omega , t_(2)` = ?
अतः ` R_(2) = R_(1) [ 1 + alpha (t_(2) - t_(1))]`
` alpha = 1.70 xx 10^(-4). ^(@)C ^(-1)`
या ` (t_(2) -t_(1)) = 1/alpha ((R_(2))/(R_(1)-1))`
या ` t_(2) - t_(1) = 1/(1.70 xx 10^(-4) )((85.8)/(75.3)-1)`
या ` = 820^(@) C`
या ` t_(2) = (820 +27.0) ^(@)C = 847^(@)C`
इस प्रकार तपन अवयव का ताप ( जब धारा के कारण तापीय प्रभाव प्रतिवेश में हुई ऊष्मा क्षय के बराबर है । ) `847^(@)C` है