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बहुरूपता (Polymorphism) - किसी एक जीव के विभिन्न ऊतकों से प्राप्त DNA में एक समान बहुरूपता मिलती है। बहुरूपता (आनुवंशिक) आधार पर विभिन्न उत्परिवर्तन के कारण ही उत्पन्न होती है। किसी व्यकित में नए उत्परिवर्तन उनकी कायिक कोशिकाओं या जनन कोशिकाओं में पैदा होते हैं। यदि जनन कोशिका उत्परिवर्तन किसी व्यक्ति की संतान उत्पत्ति क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं तो वह उत्परिवर्तन स्थानांतरित होता है। जिससे जनसंख्या के दूसरे सदस्यों (लैंगिक प्रजनन द्वारा) में यह फैल जाता है। विकल्पी अनुक्रम विभिन्नता जिसे परंपरागत रूप से डी० एन० ए० बहुरूपता कहते हैं। इस प्रकार मानव जनसंख्या में से अधिक आवृत्ति में एक विस्थक में असंगति मिलने से होती है। साधारणतया यदि एक वंशागति उत्परिवर्तन जनसंख्या में उच्च आवृत्ति से मिलता है तो इसे डी० एन० ए० बहुरूपता कहते हैं। इस प्रकार की संभावना अव्यक्तैक डी० एन० ए० (Intron DNA) अनुक्रम में ज्यादा होती है। व इन अनुक्रमों में होने वाला उत्परिवर्तन व्यक्ति की प्रजनन क्षमता को प्रभावित नहीं कर पता है। इस तरह के उत्परिवर्तन एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में एकत्रित होते रहते हैं। जिसके फलस्वरूप विभिन्नता बहुरूपता उत्पन्न होती है। बहुरूपता विभिन्न प्रकार की होती है जिसमे एक न्यूक्लियोटाइड में या विस्तृत स्तर पर परिवर्तन होती है। विकास व जाती उद्भावन में उपरोक्त बहुरूपता की बहुत बड़ी भूमिका होती है।