ऐसीटिक अम्ल, ट्राईक्लोरोऐसीटिक अम्ल तथा ट्राई-फ्लोरोऐसीटिक अम्ल की समान मात्रा के लिए जल के हिमांक के अवनमन में वृद्धि उपरोक्त क्रम में ही प्रेक्षित क
ऐसीटिक अम्ल, ट्राईक्लोरोऐसीटिक अम्ल तथा ट्राई-फ्लोरोऐसीटिक अम्ल की समान मात्रा के लिए जल के हिमांक के अवनमन में वृद्धि उपरोक्त क्रम में ही प्रेक्षित की जाती है । संक्षेप में व्याख्या कीजिए ।
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ऐसीटिक अम्ल, ट्राईक्लोरोऐसीटिक अम्ल तथा ट्राईक्लोरोऐसीटिक मॉल के लिए हिमांक में अवनमन का निम्नलिखित क्रम प्रेक्षित किया जाता है -
`CH_(3)COOHltCl-underset(Cl)underset(|)overset(Cl)overset(|)(C)-COOHltF-underset(F)underset(|)overset(F)overset(|)(C)-COOH`
ट्राईक्लोरोऐसीटिक अम्ल हिमांक में सर्वाधिक अवनमन प्रदर्शित करता है इसका कारण यह है कि सर्वाधिक विधुत ऋणात्मक होने के कारण फ्लोरीन सर्वाधिक `-I-` प्रभाव प्रदर्शित करता है जिसके फलस्वरूप ट्राईक्लोरोऐसीटिक अम्ल का आयनन सर्वाधिक होता है । विलयन में आयनो की अधिकतम संख्या होने के कारण यह हिमांक में सर्वोच्च अवनमन प्रदर्शित करता है (हिमांक में अवनमन एक अणुसंख्य गुणधर्म है और विलयन में उपस्थित कणों की संख्या पर निर्भर करता है) । क्लोरीन अपेक्षाकृत कम विधुत ऋणात्मक है और कम `-I-` प्रभाव प्रदर्शित करता है और या हिमांक में अपेक्षाकृत कम अवनमन प्रदर्शित करता है । एसीटिक अम्ल में कार्बन परमाणु से किसी विधुत ऋणात्मक समूह के जुड़े न होने के कारण इसका आयनन सबसे कम होता है और यह हिमांक में न्यूनतम अवनमन प्रदर्शित करता है ।