किसी इलेक्ट्रॉन के नैज चक्रणी कोणीय संवेग S एवं कक्षीय कोणीय संवेग I के साथ जुड़े चुंबकीय आघूर्ण क्रमशः `mu_(s)` और `mu_(l)` है । क्वांटम सिद्धांत के आ
किसी इलेक्ट्रॉन के नैज चक्रणी कोणीय संवेग S एवं कक्षीय कोणीय संवेग I के साथ जुड़े चुंबकीय आघूर्ण क्रमशः `mu_(s)` और `mu_(l)` है । क्वांटम सिद्धांत के आधार पर (और प्रयोगात्मक रूप से अत्यंत परिशुद्धतापूर्वक पुष्ट ) इनके मान क्रमशः निम्न प्रकार जाते हैं ।
`mu_(s)=-(e//m)S` एवं `mu_(l)=-(e//2m)I`
इनमें से कौन -सा व्यंजक चिरसम्मत सिद्धांतों के आधार पर प्राप्त करने की आशा की जा सकती है ? उस चिरसम्मत आधार पर प्राप्त होने वाले व्यंजक को व्यूत्पन्न कीजिए ।
1 Answers
कक्षीय चुंबकीय आघूर्ण `mu_(l)=IA`
`thereforemu_(l)=(e)/(T)*pir^(2), [I=(e)/(T)]`
कक्षीय कोणीय संवेग `L=mvr=m*(2pi)/(T)*r^(2)`,
`[thereforev=(2pir)/(T)]`
`therefore(mu_(l))/(L)=((e)/(T)*pir^(2))/(m*(2pir^(2))/(T))=(e)/(2m)`
इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित है अतः `mu_(l)` व I समांतर नहीं होंगे तथा `mu_(l)` व L कक्षा के तल के अभिलम्बवत होगें ।
`vecmu_(l)=-(e)/(2m)*vecL`
यह संबंध चिरसम्मत भौतिक के अनुसार है लेकिन `(mu_(s))/(S)=-(e)/(m)` संबंध आधुनिक क्वांटम सिद्धांत से प्राप्त संबंध है ।